अब ड्रोन रोधी तकनीक से ध्वस्त होंगे पाक के नापाक मंसूबेBookmark and Share

PUBLISHED : 09-Oct-2019


पंजाब के तरनतारन में पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा हथियार गिराए जाने की घटना के बाद से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। सरकार अलग-अलग ड्रोन रोधी तकनीक के फील्ड परीक्षण के लिए एजेंसियों और अर्धसैनिक बलों को हरी झंडी देने का मन बना चुकी है। भारत में बनाए गए कुछ ड्रोन रोधी मॉडल का परीक्षण करने के साथ नए सिरे से तकनीक विकसित करने पर भी काम शुरू करने को कहा गया है जिससे कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन भी आसानी से पकड़ में आ सकें।

विदेशी तकनीक पर भी नजर
बाहरी देशों से भी ड्रोन रोधी तकनीक साझा करने पर बात हो रही है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और अमेरिका की तकनीक शामिल है। ऑस्ट्रेलिया में निर्मित ड्रोन गन रेडियो और जीपीएस की कार्यप्रणाली को जाम कर सकती है। यह मोबाइल सिग्नल को भी रोकने में सक्षम है। जिसके जरिए ड्रोन लक्ष्य से भटक सकता है और जमीन पर उतरने को मजबूर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में डिजाइन किए गए इस उपकरण की सीमा दो किलोमीटर तक है।
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रास्ते में ही रोकने में मिलेगी सफलता
स्काई फेंस प्रणाली की भी अलग-अलग तकनीक पर विचार किया जा रहा है। इसके माध्यम से खतरनाक ड्रोन को लक्ष्य से पहले ही रोका जा सकता है। इस तकनीक से ड्रोन के रास्ते को ही जाम किया जा सकता है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी पीके मिश्रा ने कहा कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फेंस सिस्टम और सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम के जरिए सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन पर नजर रखने की जरूरत है। साथ ही नई तकनीक पर काम करने की जरूरत है।

सुरक्षा एजेंसियां कर रही मंथन
बीपीआरडी ने पिछले दिनों ड्रोन रोधी तकनीक को लेकर काफी मंथन भी किया था। विचार विमर्श में सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े तमाम आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ड्रोन बड़ा खतरा हो सकते हैं। खासतौर पर सऊदी अरब में हुए खतरनाक ड्रोन हमले और पंजाब में पकड़े गए ड्रोन को सुरक्षा एजेंसियां आने वाले दिनों की चुनौती से जोड़कर देख रही हैं। एक निजी कंपनी के एरोस्कोप ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम सहित कई अन्य मॉडल का परीक्षण किया जा चुका है। लेकिन अभी पूरी तरह से संतोषजनक परिणाम के लिए नई तकनीक पर काम हो रहा है

आतंकी कर सकते हैं ड्रोन का इस्तेमाल
सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जैश ए मोहम्मद, लश्कर जैसे कुख्यात आतंकी संगठन अपने खतरनाक इरादों को अंजाम देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। पंजाब में भी ड्रेान से हथियार गिराने की घटना को आंतकवाद को बढ़ावा देने की आईएसआई की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है।

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