वायरल संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे आपके बच्चे, बस ध्यान रखें ये जरूरी बातेंBookmark and Share

PUBLISHED : 08-Sep-2019



इस मौसम में वायरल संक्रमण की आशंका काफी बढ़ जाती है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण खासकर बच्चे इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। लेकिन आप अपने बच्चे को इन संक्रमणों की चपेट में आने से वक्त रहते बचा सकते हैं। कैसे बता रहे हैं ऑनक्वेस्ट लेबोरेटरीज के सीओओ व पैथोलॉजी विभाग के एमडी डॉ. रवि गौड़।

संयुक्त राष्ट्र के इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टेलिटी एस्टीमेशन की तरफ से जारी डेटा में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि भारतीय बच्चों में जिंदगी के पहले साल में सबसे ज्यादा मृत्यु दर अब भी जारी है। वायरल संक्रमणों में भी रोटावायरस और एंटरिक वायरल (आंत संबंधी संक्रमण) जैसी बीमारियां बड़ों की तुलना में बच्चों के लिए अधिक गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

बाल अवस्था के ज्यादातर वायरल संक्रमण ज्यादा गंभीर नहीं होते। इनमें सर्दी लगना, नाक बहना, आंखों से पानी निकलना, गले में खराश होना, बुखार होना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना और उल्टी व दस्त जैसी विभिन्न बीमारियां शामिल हैं। व्यापक पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण के चलते खसरा जैसे गंभीर खतरे पैदा करने वाली कुछ संक्रामक बीमारियां अब कम ही देखने को मिलती हैं।

.तो बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं-
यदि आपके बच्चे में बीमारी के लक्षण एक सप्ताह से ज्यादा दिखाई दें, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। यह शरीर की तरफ से स्पष्ट तौर पर वायरल संक्रमण के खिलाफ एक कॉल हो सकती है, जो न्यूमोनिया आदि जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है। ऐसे समय में बच्चे का रक्त परीक्षण कराकर मलेरिया, डेंगू, टाइफॉएड, चिकनगुनिया, अर्बोवायरस आदि बीमारियों समेत संपूर्ण ब्लड काउंट अवश्य जांच लेना चाहिए। मौसम में बदलाव या भारी बारिश होने के दौरान अभिभावक अमूमन अपने बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करते ही हैं, लेकिन यह जानना बेहद अहम है कि बच्चों को अन्य मौसम में भी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है।

बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय-
रूमाल की जगह टिश्यू पेपर रखें : अभिभावक आमतौर पर अपने बच्चों की बहती नाक और मुंह बार-बार पोंछने के लिए सूती रूमाल अपने साथ रखते हैं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे बच्चे बार-बार संक्रमण के संपर्क में आते हैं।

कपड़े के रूमाल की तुलना में भीगे मेडिकेटिड स्किनकेयर वाइप और टिश्यू पेपर त्वचा के लिए ज्यादा कोमल साबित होते हैं और इनकी सबसे अच्छी बात ये है कि इन्हें उपयोग करने के बाद आसानी से फेंका जा सकता है। अभिभावकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हाथों में चिपक जाने वाले हानिकारक विषाणुओं से बचाव के लिए नाक साफ करने के बाद हर बार तुरंत अपने हाथ पानी व साबुन की मदद से अच्छी तरह से धोएं।

संक्रमित बच्चों से बनाएं दूरी- बच्चों को पड़ोस या स्कूल में खेलते समय उन बच्चों से दूर रखना चाहिए, जो संक्रामक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। अच्छी तरह हाथ धोने और नाखूनों की सफाई करते हुए उचित स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

सफाई का ध्यान रखें- मच्छर, मक्खी, खटमल आदि हानिकारक कीटाणुओं व विषाणुओं के सबसे सक्रिय वाहक होते हैं। बच्चे इनका *सबसे आसान निशाना होते हैं। मच्छरों से बचाव के लिए अपने आसपास पानी जमा नहीं होने दें। सुबह और शाम के समय बच्चों को घर से बाहर कम ही निकलने दें। अपने आस-पड़ोस में कूड़ा-कबाड़, बेकार कंटेनर और डिब्बे आदि जमा *नहीं होने दें, क्योंकि इनमें ही मच्छरों का प्रजनन होता है।

समय पर टीकाकरण- शिशुओं और बच्चों को जानलेवा संक्रमण और बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका है। इसके बावजूद माता-पिता इस पहलू की अनदेखी करते हैं। बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर ही अभिभावक उन्हें टीका लगवाने के लिए हॉस्पिटल ले जाते हैं।

डिफ्थीरिया, टेटनस, और हूपिंग कफ (काली खांसी), पोलियो (आईपीवी), रोटावायरस (आरवी), इन्फ्लुएंजा (फ्लू), खसरा, कंठमाला, रूबेला (एमएमआर) से बचाव के लिए बच्चे को शुरू से निर्धारित समय पर बीमारियों से संबंधित टीके अवश्य लगवाएं।

प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करना- वायरल संक्रमणों से बचाव करने के लिए बच्चों के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करना सबसे अच्छे तरीकों में से एक है। इसके लिए बच्चों को संतुलित खुराक के साथ पौष्टिक खाना दें। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे अच्छा पौष्टिक भोजन होता है। ताजा फल और सब्जी हर उम्र के बच्चों के लिए आवश्यक होते हैं। पानी, दूध और फलों के जूस के जरिए बच्चों के शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें। बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए हानिकारक सोडा, चिप्स, चॉकलेट और कुकीज जैसे खाद्य पदार्थ कम-से-कम दें। उनके खान-पान में दलिया व अनाज को प्रमुखता से शामिल करें, क्योंकि इनसे उन्हें बहुत सारे पोषक तत्व मिलते हैं।

माता-पिता भी रखें अपना ध्यान- माता-पिता को वायरस से बचाव के लिए अपना भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि माता या पिता में से किसी एक को भी संक्रमण होने पर बच्चों के इसकी चपेट में आने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

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