जापान के बौद्ध मंदिर में करुणा की शिक्षा देने के लिए रोबॉट पुजारीBookmark and Share

PUBLISHED : 16-Aug-2019



क्योटो
जापान के एक 400 साल पुराने बौद्ध मंदिर में पुजारी के तौर पर रोबॉट को नियुक्त किया है। बौद्ध मंदिर में रोबॉट की नियुक्ति पर विवाद भी हुआ था, लेकिन इसके बाद भी ऐंड्रॉयड कैनन को क्योटो के कोदाइजी टेंपल में रखा गया है। रोबॉट टेंपल आनेवाले श्रद्धालुओं को दया और करुणा का संदेश देता है। टेंपल में मौजूद अन्य पुजारी रोबॉट की सहायता करते हैं और उन्हें यकीन है कि कृत्रिम इंटेलिजेंस के जरिए आनेवाले दिनों में रोबॉट और अधिक बुद्धिमान नजर आएगा।

बदलते वक्त के साथ रोबॉट में किया जाएगा बदलाव
मंदिर के एक पुजारी थेनसे गोटो ने कहा, 'यह रोबॉट कभी भी नहीं मरेगा। समय के साथ यह अपने में कुछ सुधार करते जाएगा और खुद को बदलते वक्त के साथ प्रासंगिक बनाएगा। यही इस रोबॉट की खासियत है। बदलते हुए बौद्ध धर्म के अनुसार यह लगातार अपने ज्ञान में वृद्धि करेगा और यह हमेशा वक्त के साथ चलता रहेगा।'

व्यस्क व्यक्ति के आकार जितना है रोबॉट
एक व्यस्क व्यक्ति के आकार के इस रोबॉट ने इस साल के शुरुआत से काम करना शुरू किया था। इसकी बाहें और शरीर को हिलने-डुलने में सक्षम बनाया गया है। चेहरे और कंधे को सिलिकॉन से ढंका गया है ताकि यह इंसानी त्वचा के जैसा महसूस होता। अपने दोनों हाथों को जोड़कर बहुत कोमल आवाज में रोबॉट प्रार्थना करता है। हालांकि, रोबॉट का मशीनी पहलू भी लोगों को आसानी से नजर आता है। ऐल्युमिनियम की बॉडी और जलती लाइट्स इसके मशीनी होने का अहसास भी देते हैं।

10 लाख की लागत से तैयार रोबॉट देता है करुणा की शिक्षा
ओसाका यूनिवर्सिटी के मशहूर रोबॉटिक्स प्रफेसर और जेन टेंपल के सहयोग से इस रोबॉट का निर्माण करीब 10 लाख रुपये में किया गया है। रोबॉट की खासियत है कि यह श्रद्धालुओं को समवेदना और करुणा के बारे में शिक्षा देता है। इसके साथ ही वासना, क्रोध और अहंकार के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसकी भी सीख देता है।

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