बीमा कंपनी के लिए क्लेम पर 30 दिनों के अंदर फैसला करना ज़रूरीBookmark and Share

PUBLISHED : 06-Apr-2017




नयी दिल्ली: उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि बीमा कंपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के अंदर दावे को स्वीकार या खारिज करने के लिए बाध्य है. आयोग ने एक बीमा कंपनी से एक व्यापारी को 10 लाख रुपया से अधिक का भुगतान करने का निर्देश देते हुए यह कहा.
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से ओड़िशा निवासी मदन लाल गुप्ता को इस रकम का भुगतान करने को कहा, जिनका गोदाम 1999 में लूट लिया गया था और 2002 में बीमा का दावा इनकार कर दिया गया था.

30 दिनों के अंदर दावे को स्वीकार या खारिज करने के लिए बाध्य

आयोग ने कहा, ‘बीमा करने वाली कंपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के अंदर दावे को स्वीकार या खारिज करने के लिए बाध्य है.’ उसने घटना के तीन साल बाद दावे को खारिज किये जाने को बीमा कंपनी की ओर से सेवा में खामी बताया. आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह गुप्ता को 10,47,635 रुपया के साथ 10,000 रुपया खर्च भी अदा करे.

बीमा कंपनी ने दो साल से अधिक चुप्पी साधी रखी  

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी के जैन की अध्यक्षता वाली एनसीडीआरसी पीठ ने कहा, ‘सर्वेक्षक ने 12 जुलाई, 2000 को बीमा कंपनी को अपनी रिपोर्ट सौंपी. कंपनी ने दो साल से अधिक समय तक चुप्पी साधे रखने के बाद 12 दिसंबर, 2002 को अपने पत्र के माध्यम से दावे को अस्वीकार कर दिया...’

इसने कहा, ‘ऐसी स्थिति में हमारे पास यह मानने के सिवा कोई विकल्प नहीं है कि बीमा कंपनी द्वारा संबंधित दावे को अस्वीकार करना अनिवार्य सांविधिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है और यह उनकी ओर से सेवा में खामी जैसा है.’ इसने कहा कि यदि दावा अस्वीकार किया गया तो उक्त अवधि में बीमाधारक को लिखित में कारण बताया जाना होता है.

1999 में चक्रवात की वजह से गोदाम लूट

गुप्ता की शिकायत के अनुसार 1999 में ओड़िशा में आए चक्रवात के दौरान कुछ बदमाशों ने उनका गोदाम लूट लिया था. बीमा कपंनी के सर्वेक्षक ने नुकसान का सर्वेक्षण किया. आखिरकार, बीमा कंपनी ने दिसंबर 2002 में यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नुकसान चोरी के चलते नहीं, बल्कि लूट के चलते हुआ.
ज़ी न्यूज़ डेस्क

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