उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ का दूसरा शाही स्नान, लाखों श्रद्धालु जुटेBookmark and Share

PUBLISHED : 10-May-2016


उज्जैन। महाकाल की नगरी मध्यप्रदेश के उज्जैन में अक्षय तृतीया के मौके पर हो रहे सिंहस्थ के दूसरे शाही स्नान में सोमवार तड़के से लेकर देर रात तक साधु-संतों समेत कम से कम 45 लाख से अधिक श्रद्धालु मोक्षदायिनी क्षिप्रा में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। उज्जैन में  भारी  बारिश के बाद भी  श्रद्धालुर्ओ की आस्था में कहीं कमी नहीं देखी गई। देश-विदेश के लाखों लोगों ने शाही स्नान का पुण्य कमाया। 
* उज्जैन में दोपहर बाद हुई बारिश परेशानी  का सबब बन गई। सोमवार की दोपहर शुरू हुई तेज आंधी और जोरदार बारिश ने लाखों श्रद्धालुओं  और प्रशासन को मुसीबत में डाल दिया। आंधी और बारिश से एक की मौत और 2 श्रद्धालुओं के घायल होने की खबर है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि होनी  बाकी है।  बारिश के बाद उज्जैन शहर अंधेरे में डूब गया। कुछ स्थानों पर ओले गिरने के भी समाचार हैं। बारिश के कारण कई पंडालों  में पानी भर गया और कुछ तो उखड़ भी गए।
  * शाही स्नान के दौरान दोपहर करीब 3 बजे अचानक आसमान पर घने काले बादल छा गए। कुछ देर बाद तेज बारिश शुरू हो गई। इस दौरान कई जगहों पर ओले भी गिरे। अचानक शुरू हुई बारिश से अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद भी लोग स्नान करते रहे।
 * तेज आंधी के कारण मंगलनाथ और लालपुरा क्षेत्र में कई जगहों पर पंडाल उखड़ गए हैं। मंगलनाथ में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि अन्य क्षेत्रों में दो लोगों के घायल होने की सूचना है। कई पंडालों में पानी भरने से साधु-संत समेत श्रद्धालु परेशान हुए।
 * मेला क्षेत्र स्थित कम्प्यूटर बाबा के पंडाल का गेट फिर से गिर गया है। आंधी से मेघदूत ढाबे के सामने एक बड़ा टॉवर गिर गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने हाईअलर्ट जारी कर दिया। मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी थी कि दोपहर 2 बजे के बाद बारिश और आंधी का अंदेशा है।
* बारिश आने  से पहले सोमवार की सुबह उज्जैन की ऐसी कोई गली नहीं थी, जहां 1000 से अधिक श्रद्धालु न हों। जहां नजर दौड़ाओ, उधर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ था। 
*  रविवार रात  से  ही स्थानीय प्रशासन ने रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट को सुरक्षा के लिहाज से कवर कर लियाा था। यहां पर अन्य लोगों को  जाने की इजाजत नहीं थी, लेकिन दूसरे घाटों को भगवान के हवाले कर दिया था।
*  उज्जैन की सड़कों  की हालत ऐसी हो गई थी कि वहां  पैर रखने की जगह तक नहीं थी। शाही स्नान की  चाहत में श्रद्धालु सड़क  के बजाए रेल की पटरी-पटरी चलकर उज्जैन पहुंच रहे थे।

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