असम-केरल में सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस, ममता-जया का जलवा कायमBookmark and Share

PUBLISHED : 20-May-2016


भाजपा ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर पूर्वोत्तर के किसी राज्य में पहली बार बहुमत हासिल कर इतिहास बना दिया है। कांग्रेस को केरल में भी सत्ता से बेदखल कर दिया गया जबकि ममता बनर्जी और जयललिता दोनों महिला मुख्यमंत्रियों ने क्रमश: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अपनी अपनी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में जगह दिलायी।

कांग्रेस को इस बात से कुछ संतोष मिल सकता है कि वह विधानसभा चुनावों के ताजा चरण में पुडुचेरी में जीत दर्ज करने में सफल रही। पुडुचेरी में कांग्रेस ने खुद से अलग होकर बनी पार्टी एआईएनआरसी को शिकस्त दी।

असम में भाजपा को 87 सीटें   
असम में तरूण गोगोई तीसरी बार सत्ता में आने में नाकाम रहे।  केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर पेश करने वाली भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों अगप एवं बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 126 सदस्यीय विधानसभा की 87 सीटें जीतीं।

भाजपा ने इस बार 60 सीटें जीतीं जो पिछली बार से पांच सीटें ज्यादा है। अगप ने 14 सीटें जीतीं जबकि बीपीएफ ने 13 सीटें जीतीं। पिछली बार अगप को 10 जबकि बीपीएफ को 12 सीटें मिली थीं।

पिछली बार 78 सीटें जीतने वाली कांग्रेस को इस बार केवल 26 सीटों से संतोष करना पड़ा। बदरूद्दीन अजमल के नेतृत्व में एआईयूडीएफ ने 13 सीटें जीतीं जो पिछली बार से पांच कम हैं।
   
ममता का जलवा कायम, जीतीं 211 सीटें
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने विपक्षी गठबंधन वामदल-कांग्रेस दो तिहाई बहुमत हासिल किया। तृणमूल ने 2011 के अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 211 सीटें जीतीं। पिछली बार पार्टी को 184 सीटें मिली थीं।

कांग्रेस ने भी राज्य में अपना प्रदर्शन बेहतर करते हुए पिछली बार के 42 की तुलना में 44 सीटें जीतीं। कांग्रेस की सहयोगी माकपा को पिछली बार के 40 सीटों की तुलना में इस बार केवल 26 सीटें मिलीं जबकि दूसरे वाम दलों भाकपा को एक, फॉरवर्ड ब्लॉक को दो और आरएसपी को तीन सीटें मिलीं।

जयललिता ने तोड़ी 32 सालों की परंपरा
तमिलनाडु में 32 सालों की परंपरा इस बार टूट गयी जब अन्नाद्रमुक ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। राज्य में हर विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के हारने की परंपरा है।

जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को परास्त करते हुए 134 सीटें जीतीं जो 234 सदस्यीय विधानसभा में जादुई आंकड़े से 16 ज्यादा है। दो विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव 23 मई के लिए टाल दिया गया।

हालांकि पार्टी को बहुमत मिल गया है, अन्नाद्रमुक के प्रदर्शन में पिछली बार की तुलना में गिरावट आयी है। 2011 के चुनाव में पार्टी ने 150 सीटें जीती थीं। हालांकि 1984 के बाद से तमिलनाडु में पहली बार सत्तारूढ़ पार्टी को जनता ने सत्ता में वापसी का टिकट दिया है।

91 साल के एम करूणानिधि के नेतृत्व में द्रमुक ने मजबूत चुनौती पेश करते हुए 89 सीटें जीतीं। तमिलनाडु विधानसभा में भी यह संभवत: पहली बार होगा जब विपक्ष इतनी बड़ी संख्या में होगा। द्रमुक के सहयोगी कांग्रेस को आठ जबकि आईयूएमएल को एक सीट मिली। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पीएमके और अभिनेता विजयकांत के नेतृत्व वाले तीसरे मोर्चे को एक भी सीट नहीं मिली।
   
केरल में कांग्रेस सत्ता से बाहर, भाजपा ने रचा इतिहास
केरल में सत्तारूढ़ दल को बेदखल करने का चलन जारी रहा और कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ के हाथों से सत्ता फिसलकर वाम गठबंधन एलडीएफ के पास चली गयी। माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ ने कांग्रेस नीत यूडीएफ को भारी शिकस्त देकर आसान जीत हासिल की। केरल में भाजपा ने विधानसभा में खाता खोलकर इतिहास रचा।

एलडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 91 सीटें जीतीं जिनमें उसके समर्थन से चुनाव लड़ने वाले छह निदर्लीय उम्मीदवारों की सीटें शामिल हैं। गठबंधन सहयोगियों में माकपा को 58, भाकपा को 19, राकांपा को दो और केसी (बी), सीएमपी, आरएसपी (एल), जेडी (एस) और कांग्रेस (एस) को एक-एक सीटें मिलीं।

यूडीएफ में कांग्रेस को 22, आईयूएमएल को 18, केसी(एम) को छह, केसी(जे) एक सीटें मिलीं। कांग्रेस नेतृत्व वाले मोर्चे को 47 सीटें मिलीं।

एलडीएफ के चुनाव अभियान का चेहरा रहे वी एस अच्युतानंदन, माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य पिनराई विजयन, थॉमस इस्साक, ई पी जयराजन और अभिनेता मुकेश एलडीएफ की तरफ से चुनाव जीतने वाले प्रमुख नाम हैं।

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ राजगोपाल ने नेमोम सीट से माकपा उम्मीदवार वी सिवनकुटटी को 8,671 वोटों के अंतर से हराया।

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