कैसे हुआ पाकिस्तान-सऊदी के बीच दोस्ती का दी एंड, क्यों अपने ही पैर पर पाक ने मारी कुल्हाड़ी Bookmark and Share

PUBLISHED : 12-Aug-2020



कश्मीर मसले पर पाकिस्तान की बेकार जिद ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा है। उसके दशकों पुराने मित्र सऊदी अरब ने भी अब उसका साथ छोड़ दिया है और बात यहां तक आ गई है कि उसने पाकिस्तान को तेल और कर्ज देना बंद कर दिया है। कश्मीर मसले पर इस्लामिक सहयोग संगठन से समर्थन नहीं मिलने पर पाकिस्तान का सऊदी अरब को धमकाना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना साबित हो गया। अब सऊदी ने न सिर्फ पैसे और तेल देना बंद कर दिया है, बल्कि उसने वसूली भी शुरू कर दी है। यही वजह है कि पाकिस्तान को इसी महीने सऊदी अरब को 1 अरब  डॉलर का कर्ज लौटाना पड़ा।

दरअसल, जबसे भारत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया है, तब से पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान हर जगह कश्मीर मसला उठाना चाहता है। यही वजह है कि पाकिस्तान सऊदी अरब पर भी काफी समय से कश्मीर मसले पर इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक बुलाने का दबाव बनाता आ रहा है। इसी साल फरवरी में पाकिस्तान ने सऊदी अरब से इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक बुलाने को कहा था, मगर सऊदी अरब ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद से पाकिस्तान आग-बबूला हो गया है और अनाब-शनाब  बयानबाजी कर रहा है। बता दें कि स्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी 57 मुस्लिम देशों का एक समूह है जिसमें सऊदी अरब का दबदबा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के बाद ओआईसी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है।

इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान ने सऊदी अरब को धमकी देकर सबसे बड़ी गलती कर दी। पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने सऊदी अरब के नेतृत्‍व वाले इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी बैठक आयोजित नहीं करने को लेकर धमकाया था और इसकी सऊदी की आलोचना की थी। इतना ही नहीं, कुरैशी ने मुस्लिम देशों के इस संगठन को तोड़ने की भी धमकी दी थी।

पाकिस्‍तान के एक लोकल न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था, 'मैं एक बार फिर से पूरे सम्‍मान के साथ इस्लामिक सहयोग संगठन से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है। अगर आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्‍य हो जाऊंगा कि वह ऐसे इस्‍लामिक देशों की बैठक बुलाएं, जो कश्‍मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं और जो दबाए गए कश्मीरियों का साथ देते हैं।'

कुरैशी ने तो यह तक कह डाला कि अगर ओआईसी विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक  बुलाने में विफल रहता है, तो पाकिस्तान ओआईसी के बाहर एक सत्र का आयोजन करेगा। क्योंकि कश्मीर मसले पर पाकिस्तान अब और इंतजार नहीं कर सकता।

नतीजा यह हुआ कि सऊदी ने साफ कह दिया है कि वह अब पाकिस्तान को तेल और लोन यानी कि कर्ज नहीं देगा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान को इसी महीने सऊदी अरब को 1 अरब  डॉलर का कर्ज लौटाना पड़ा, जो साल 2018 में सऊदी ने पाकिस्तान को 6.2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था, उसी का हिस्सा है। दरअसल, नवंबर, 2018 में सऊदी अरब द्वारा घोषित 6.2 बिलियन डॉलर के पैकेज में कुल 3 बिलियन डॉलर का कर्ज और 3.2 बिलियन डॉलर की एक ऑयल क्रेडिट सुविधा शामिल था।
साभार

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