कानूनी दांव-पेंच से भयभीत कमलनाथ सरकारBookmark and Share

PUBLISHED : 13-Aug-2019



अब बिना महाधिवक्ता कार्यालय के मार्क किये फाईलें नहीं जायेंगी

विधि विभाग ने सभी विभागों को दी हिदायत

भोपाल। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार फूंक फूंक कर कदम रख रही हैं, सरकारी फाइल बिना कानूनी राय के मंजूरी को नहीं भेजी जा रही हैं।पूर्ववर्ती सरकारों के हश्र देख कर भयभीत हो गई वर्तमान सरकार के विधि विभाग ने नए निर्देश जारी किये हैं।
हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ और ग्वालियर एवं इंदौर खण्डपीठ में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के न्यायालयीन प्रकरणों में जवाबदावा महाधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय के मार्क के बिना नहीं बनेगा। इस संबंध में राज्य के विधि विभाग ने सभी विभागों को हिदायत जारी की है।
विधि विभाग द्वारा जारी हिदायत में कहा गया है कि प्रभारी महाधिवक्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विभिन्न विभागों में न्यायालयीन प्रकरणों में नियुक्त प्रभारी अधिकारियों द्वारा महाधिवक्ता कार्यालय जबलपुर एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय ग्वालियर/इंदौर के समक्ष उपस्थित होकर सक्षम प्राधिकारी से फाईल मार्क कराये बिना शासन द्वारा नियुक्त विधि अधिकारियों से जवाब बनवाने के लिये सम्पर्क किया जाता है। अधिकृत विधि अधिकारी से फाईल मार्क न कराये जाने से बनाये गये जवाब की कोई जानकारी महाधिवक्ता कार्यालय में उपलब्ध नहीं होती है और न ही प्रकरण के महत्व के अनुसार प्रकरण विधि अधिकारियों को आवंटित हो पाते हैं। इसलिये सभी विभागों को निर्देश जारी किये जायें कि वे अपने विभाग के समस्त प्रभारी अधिकारियों को निर्देशित करें  महाधिवक्ता/अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालयों में वे अधिकृत प्राधिकारी से फाईल मार्क करवा कर ही न्यायालयीन प्रकरणों में जवाबदावा तैयार करायें या अन्य कार्यवाही करें। इसलिये अब सभी विभाग फाईन मार्क करवाकर ही प्रकरणों में जवाबदावा तैयार कराने या अन्य आवश्यसक कार्यवाही हेतु विधि अधिकारियों से सम्पर्क करें।
विधि विभाग की उक्त हिदायत पर विभागों ने कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में अपने सभी अधिनस्थ अधिकारियों एवं निकायों को इस हिदायत के अनुसार चलने के लिये निर्देशित कर दिया है। बाकी विभाग भी इस और कदम उठा रहे हैं।
महाधिवक्ता कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के सरकारी विभागों के प्रभारी अधिकारी बिना महाधिवक्ता/अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय से मार्क कराये न्यायालयीन प्रकरणों के जवाबदावा तैयार करा रहे थे। इससे महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी मिल ही नहीं पा रही थी। हम लोग ही प्रकरण की महत्ता देखकर उसे विषय विशेषज्ञ विधि अधिकारी को प्रकरण भेजते हैं। हमारे पास मार्क के लिये आने वाली फाईलों को हम रजिस्टर पर चढ़ाते भी हैं जिससे हमें उस प्रकरण के बारे में जानकारी रहती है। इसीलिये हमने इस बारे में विधि विभाग से आग्रह किया था।

 

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