एक महीने पहले दुनिया से विदा हुई थी दामिनीBookmark and Share

PUBLISHED : 29-Jan-2013

नई दिल्ली। दिल्ली में गैंगरेप की शिकार हुई बहादुर बेटी की मौत को आज एक महीना पूरा हो गया। 29 दिसंबर 2012 को गैंगरेप पीड़ित ने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद पैदा हुए जनाक्रोश ने पुलिस, प्रशासन और सरकार को हिलाकर रख दिया था। फिलहाल ये मामला अदालत में है। केस की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हो चुका है। 29 दिसंबर 2012 यही वो तारीख है, जब सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल से आई एक खबर ने पूरे देश को सन्न कर दिया। दिल्ली गैंगरेप की पीड़ित ने 13 दिन के संघर्ष के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया।

वो बहादुर लड़की जब 16 दिसंबर से लेकर 29 दिसंबर तक अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी, तब देश की सड़कों पर उसके लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ी जा रही थी। 17 दिसंबर को इस घटना की खबर मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंची। इस जघन्य घटना ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। महिलाओं की सुरक्षा के सवाल ने हर किसी को झकझोर दिया। देशभर में इसके खिलाफ धरना और प्रदर्शन हुए। उधर सफदरजंग अस्पताल के भीतर डॉक्टर पीड़ित लड़की को बचाने की हर मुमकिन कोशिश में जुटे थे।

मगर डॉक्टरों के लिए चुनौती कम नहीं थी लड़की की छोटी आंत को उन्हें पूरी तरह निकालना पड़ा। खून में संक्रमण और इंटरनल ब्लीडिंग से डॉक्टर परेशान थे। इस दौरान लड़की को 3 बार सर्जरी से गुजरना पड़ा और एक बार उसे दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल में डॉक्टर मौत को मात देने की तैयारी कर रहे थे तो देशभर की सड़कों पर गैंगरेप के दरिंदों को फांसी की सजा देने की मांग होने लगी। जनता का सड़क पर उतरना सरकार के लिए चेतावनी से कम नहीं था। सरकार को ये महसूस हो गया कि वक्त रहते अगर इस मसले पर जनता को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो हालात काबू से बाहर भी हो सकते हैं। 18 दिसंबर को संसद में ये मुद्दा प्रमुखता से गूंजा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद जनता को संदेश देने के लिए टीवी पर आए। गृह मंत्री भी जनता के सामने आए।

23 दिसंबर की रात गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। ये नोटिफिकेशन बलात्कार और यौन हिंसा से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव के लिए बनी कमेटी का था। इस बीच पुलिस ने इस वारदात के सभी 6 आरोपियों को पकड़ लिया। 24 दिसंबर को दिल्ली के उप राज्यपाल तेजेंदर खन्ना अपनी छुट्टी से बीच में ही वापस लौट आए। इसके बाद तेजेंदर खन्ना ने दिल्ली पुलिस के एसीपी ट्रैफिक और एसीपी पीसीआर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया।

26 दिसंबर की सुबह खबर आई कि लड़की की हालत बेहद नाजुक है। बेहतर इलाज के लिए पीड़ित को एयर एंबुलेंस के जरिए सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां भी डॉक्टर उसे बचा न सके। और आखिरकार 13 दिन के संघर्ष के बाद 29 दिसंबर 2012 को देश की बेटी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। वो बहादुर लड़की भले ही जिंदगी की जंग हार गई लेकिन उसकी जलाई लौ से आज भी देश धधक रहा है।

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