रेनसमवेयर अटैकः भारत समेत 150 देशों के 2 लाख कंप्यूटर प्रभावित, आज फिर हो सकता है बड़ा हमलाBookmark and Share

PUBLISHED : 15-May-2017



साइबर सुरक्षा शोध से जुड़ी एक संस्था ने रविवार को चेतावनी दी कि शुक्रवार को हुए सबसे बड़े साइबर हमले के बाद दूसरा बड़ा हमला आज हो सकता है। इस साइबर हमले में 150 देशों में 2 लाख से ज्यादा कंप्यूटर चपेट में आए। इधर, भारत में भी कई राज्यों में भी रेनसमवेयर का अटैक हुआ है। रविवार को यूपी के गोरखपुर के पार्क रोड की यामाहा एजेंसी की वेबसाइट हैक हो गई। एजेंसी मालिक संदीप वैश्य ने बताया की रात में वेब साइट लॉक हो गयी है और यह मैसेज आया। आइटी एक्स्पर्ट्स ने बताया है कि यह रेनसमवेयर हैकर्स की कारस्तानी है। हैकर्स ने तीन दिन में 300 डॉलर्स जमा करने को कहा है। कारोबारी ने थाने में तहरीर दी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के सुरक्षा शोधकर्ता 'मैलवेयर टेक' ने भविष्यवाणी की है कि दूसरा हमला आज की संभावना है और अगर लोग सतर्क न रहे तो इसके शिकार लोगों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि आज हफ्ते का पहला कार्यदिवस होगा। 'मैलवेयर टेक' ने रैनसमवेयर वायरस को सीमित करने में मदद की। इस वायरस ने उपभोक्ताओं की फाइलों को अपने नियंत्रण में ले लिया। यह वायरस भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, स्पेन, फ्रांस और रूस सहित 150 देशों में फैल गया।

ब्रिटेन में 48 राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाएं (एनएचएस) ट्रस्ट व स्कॉटलैंड के 13 एनएचएस निकाय इसके शिकार हुए। इससे कुछ अस्पतालों को अपनी सेवाएं रद्द करनी पड़ी। कंप्यूटरों को नियंत्रण में लेने के बाद वायरस ने फाइलों को खोलने और उपभोक्ताओं के इस्तेमाल करने के लिए 300 से 600 डॉलर बिटकॉइन के भुगतान की मांग की गई।

वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक डोमेन का पंजीकरण कराए जाने के बाद मैलवेयर टेक का 'आकस्मिक हीरो' के तौर पर स्वागत किया गया। 'मैलवेयर टेक' अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहता। बीबीसी से 22 वर्षीय एक व्यक्ति ने रविवार को कहा कि हमने इसे रोक दिया है, लेकिन कोई दूसरा आ रहा है और इसे हम नहीं रोक पाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास इस काम को करने के अच्छे मौके हैं। इस सप्ताहांत नहीं, लेकिन इसे सोमवार सुबह तक करने की संभावना है। उन्होंने ट्वीट किया कि वाना डिक्रिप्टर या वानाक्राई का संस्करण 1 रोक दिया गया, लेकिन संस्करण 2.0 को शायद ही हटाया जा सके। इस हमले से आप तभी सुरक्षित हैं, यदि आप जल्द से जल्द मरम्मत कर सकें।
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हैकरों की तलाश शुरू
अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं ने दुनियाभर के कई देशों के बैंकों, अस्पतालों और सरकारी एजेंसियों आदि के सिस्टमों को प्रभावित करने वाले साइबर हमले के पीछे के लोगों की तलाश शुरू कर दी है। इसी बीच सुरक्षा विशेषज्ञ इस स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश में हैं। यूरोप की पुलिस एजेंसी यूरोपूल ने कहा कि दोषियों का पता लगाने के लिए एक जटिल अंतरराष्ट्रीय जांच की जरूरत होगी। उसने कहा कि उसके यूरोपियन साइबर क्राइम सेंटर में एक विशेष कार्य बल को ऐसी जांचों में मदद करने के लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया है और यह जांच में सहयोग के लिए अहम भूमिका निभाएगा।

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