ज़रा सी ठंडक कहीं पड़ ना जाए भारीBookmark and Share

PUBLISHED : 24-Apr-2013

komal sharma

भोपाल-चिलचिलाती गर्मी में लस्सी, गन्ने का रस, कैरीपना या नींबू पानी को गर्मी से राहत पाने का अचूक उपाय माना जाता है... और इन सब को ठंडा करने के लिये धडल्ले से बर्फ का इस्तेमाल भी किया जाता है... आमतौर पर ग्राहकों को यही पता होता है कि उनके गिलासों में डाला गया ये बर्फ पीने के साफ पानी से बना है... लेकिन हम आपकों बता दें की कि करीब 20 लाख आबादी वाले भोपाल शहर में खाने पीने में इस्तेमाल की जाने वाली बर्फ बनाने का लाइसेंस केवल एक ही कंपनी को है... इसके अलावा शहर में जितनी भी बर्फ बनाई जा रही है.. वह खाने पीने में इस्तेमाल के काबिल ही नहीं है... हालाँकि बर्फ व्यवसाय से जुडे़ लोग कहते है कि इस बर्फ का इस्तेमाल खाद्य के रुप में नहीं किया जाता बल्कि इसके जरिये खाद्य व अखाद्य सामग्री को ठंडा रखकर उसे सड़ने से बचाया जाता है ।लेकिन हकीकत कुछ और है... गर्मी के मौसम में रोजाना बडी तादाद में बर्फ की खपत होती है... खाने पीने में इस्तेमाल होने वाली इस बर्फ की जरुरत को पूरा करना केवल एक लाइसेसी निर्माता के लिये मुमकिन नहीं है... जाहिर है कि बडी तादाद में ऐसी बर्फ का इस्तेमाल हो रहा है जो खाने के लिये कतई ठीक नहीं है... लेकिन हालत ये है कि सडकों पर ठंडे पेय बेचने वालों को खाद्य व अखाद्य बर्फ का अंतर भी नही पता ।उधर खाद्य एवं चिकित्सा विभाग सब कुछ जानते हुए भी कोई ठोस कार्रवाई करने में असमर्थ है... विभाग की परेशानी ये है कि पूरे शहर की जिम्मेदारी केवल 6 अधिकारियों पर है... ऐसे में सडकों, गली मोहल्लो में जगह जगह इस्तेमाल हो रही दूषित बरफ पर वह अंकुश लगाये तो कैसे.. हालांकि विभाग के अधिकारी सख्त कार्रवाई की बात जरुर कह रहें है..ऐसे में शहर के कोने कोने में अमानक बर्फ का इस्तेमाल धडल्ले से जारी है... और इस बर्फ से होने वाली बीमारियों के मामले में सब कुछ भगवान भरोसे है.।

 

लाइफ स्टाइल

बच्चों को 5 साल के अंदर जरुर लगवाएं ये टीके, बढ़े ह...

PUBLISHED : Dec 12 , 2:35 PM

बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरों की वजह से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत जरुरी है, ऐसे में बच्चों क...

View all

बॉलीवुड

Prev Next