कमलनाथ का इस्तीफा नाकाफी, एसआईटी दर्ज करें केस: AAPBookmark and Share

PUBLISHED : 17-Jun-2016


   

84 सिक्ख नरसंहार में आरोपों से घिरे कांग्रेस नेता कमलनाथ को पंजाब के कांग्रेस प्रभारी का पद छोड़ना पड़ा है। लेकिन आम आदमी पार्टी का मानना है कि यह नाकाफ़ी है क्योंकि 1 नवम्बर 1984 को गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में उत्पात मचाने वाली भीड़ का नेतृत्व करने वाले कमलनाथ पर केस चलना चाहिए और उन्हे कानून के हिसाब से सज़ा भी होनी चाहिए।

दिल्ली में बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और 84 के कत्लेआम के पीड़ितों की लड़ाई कोर्ट में लड़ने वाले वकील एच एस फुल्का ने कहा कि 'हमने ही कमलनाथ का विरोध किया था और उसी के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है लेकिन यह काफ़ी नहीं है, हम मांग करते हैं कि कमलनाथ पर उस उत्पाती भीड़ का नेतृत्व करने को लेकर केस चलना चाहिए। उनके खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे वो आजतक बचते आए हैं। जस्टिस नानावटी कमिशन के समक्ष जब खुद कमलनाथ ने हलफ़नामें में ये बात कुबूल की है कि वो वहां मौजूद थे तो उनके खिलाफ़ भी केस चलना चाहिए'

आप विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि 'आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से 2 दिन पहले मोदी सरकार ने सिक्ख नरसंहार को लेकर रकळ का गठन कर दिया था। उसकी रिपोर्ट 6 महीने में दी जानी थी और वो रिपोर्ट अब डेढ़ साल बाद आई है और अब उसमें कहा जा रहा है कि एक विज्ञापन के ज़रिए चश्मदीदों को खोजा जाएगा। दिल्ली सरकार पहले ही कह चुकी है कि वो इस केस को लेकर अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट देने के लिए तैयार है ताकि जांच तेज़ी के साथ हो सके। लेकिन हम मोदी जी की से भी अनुरोध करते हैं कि वो गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब मामले में कमलनाथ के खि़लाफ़ भी केस दर्ज करे और जांच करे। अगर मोदी जी की सरकार ऐसा नहीं करती है तो देश को समझ में आता है कि मोदी जी और कांग्रेस आपस में मिले हुए हैं'
 

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