गायत्री मंत्र के जाप से संभव है ब्रह्मदर्शन, गायत्री मंत्र के साथ यह जपने से बरसेगा पैसाBookmark and Share

PUBLISHED : 15-Nov-2019

गायत्री मंत्र के जाप से संभव है ब्रह्मदर्शन, गायत्री मंत्र के साथ यह जपने से बरसेगा पैसा

भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण जी के साथ ऋषि मुनियों द्वारा जपे गए गायत्री मंत्र से मानव जाति का कल्याण होता ही है लेकिन महाभारत के अनुसार गायत्री मंत्र से ब्रह्मदर्शन संभव है। यह अलौकिक मंत्र मन में छिपे भय को भी समाप्त करता है।

सनातन धर्म के ग्रंथों के अनुसार गायत्री मंत्र का प्रादुर्भाव ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को हुआ था। इस मंत्र के ब्रह्मर्षि विश्वामित्र दृष्टा बने। कौशिक मुनि, जो बाद में विश्वामित्र हो गए, की तपस्थली कौसानी, उन्हीं के नाम पर है। विश्व का कल्याण करने के लिए उन्होंने गायत्री मंत्र को जनमानस में फैलाया। गायत्री जयंती को कहीं-कहीं गंगा दशहरा के अगले दिन यानी ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को भी मनाते हैं। दिव्य मंत्र- ‘ओम भूर्भुव:स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गाे देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात॥’ सनातन धर्म के मानने वाले गणेश मंत्र के बाद पूजा में इस मंत्र का उच्चारण-जाप करते ही हैं। श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्द में लिखा है कि श्रीकृष्ण स्नान करने के बाद गायत्री मंत्र का जाप करते थे। महाकवि तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है कि विश्वामित्र ने अपने शिष्यों- राम और लक्ष्मण को इस मंत्र का रहस्य विस्तार से समझाया था।
गायत्री संहिता के अनुसार, ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’ अर्थात गायत्री माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह वेदमाता हैं। समस्त ज्ञान की देवी गायत्री ही हैं। कहा जाता है कि एक बार  भगवान ब्रह्मा यज्ञ में शामिल होने जा रहे थे।

धार्मिक कार्यों में पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए पत्नी का साथ होना नितांत जरूरी होता है, परन्तु उस समय ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी सावित्री मौजूद नहीं थीं। तब उन्होंने देवी गायत्री से विवाह कर लिया। पद्मपुराण के सृष्टिखंड में गायत्री को ब्रह्मा की शक्ति बताने के साथ-साथ पत्नी भी कहा गया है। शारदा तिलक में गायत्री के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा गया है- गायत्री पंचमुखा हैं, ये कमल पर विराजमान होकर रत्न-हार-आभूषण धारण करती हैं। इनके दस हाथ हैं, जिनमें शंख, चक्र, कमलयुग्म, वरद, अभय, अंकुश, उज्ज्वल पात्र और रुद्राक्ष की माला आदि है। पृथ्वी पर जो मेरु नामक पर्वत है, उसकी चोटी पर इनका निवास स्थान है। सुबह, दोपहर और शाम को इनका ध्यान करना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से ही इनका जाप करना चाहिए। शंख स्मृति के अनुसार गायत्री मंत्र के जाप से भय समाप्त हो जाता है।

गायत्री मंत्र के साथ यह जपने से बरसेगा पैसा : सनातन धर्म के अधिसंख्य अनुयायी अलौकिक गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। कल्याणकारी गायत्री मंत्र के आगे-पीछे ऊं श्रीं ऊं लगा लें तो यह आपका जीवन बदलकर रख देगा। यदि एक माला नहीं कर सकें तो 11-11 बार करें। मान्यता है कि गायत्री मंत्र का जाप ऊं श्रीं ऊं लगाकर करने से आपके पास पैसे की कमी नहीं रहेगी। इसके साथ ही तमाम समस्याओं से मुक्त हो जाएंगे।


 गायत्री मंत्र का जाप करने से छात्रों का पढ़ाई में मन लगने लगता है। इसलिए उन्हें रोजाना इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
इस मंत्र का जाप करने से संतान प्राप्ति का सुख भी मिलता है। अगर किसी दंपत्ति को संतान नहीं हो रही है तो इस मंत्र का विधिवत जाप करके समस्या का निदान प्राप्त किया जा सकता है।

अगर किसी लड़के या लड़की की शादी नहीं हो रही है तो सोमवार के दिन गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करने से फायदा प्राप्त किया जा सकता है।
 अगर नौकरी या व्यापार में मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, तो शुक्रवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर गायत्री मंत्र का जाप करके फायदा प्राप्त किया जा सकता है।
साभार

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