CoronaVirus: वैज्ञानिकों का दावा, इतने वक्त में आ जाएगा बाजार में कोरोना का टीका Bookmark and Share

PUBLISHED : 03-Mar-2020


इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी AFP ने 29 फरवरी को एक आंकड़ा दिया, जिसके अनुसार दुनियाभर में लगभग 86 हजार लोग कोरोना वायरस से प्रभावित हैं. ये आंकड़ा Johns Hopkins University की मदद से हासिल हो सकका है. मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही कोरोना से निपटने के तरीकों की खोज भी जोर पकड़ चुकी है. इसी कड़ी में हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे कोरोना वायरस का टीका तैयार कर चुके हैं. इसके जांच का पहला चरण लगभग 2 महीनों में पूरा हो जाएगा.

चीन से फैला घातक कोरोना वायरस दुनिया के 61 देशों में फैल चुका है, कहीं कम तो कहीं ज्यादा लेकिन इसकी भयावहता हर जगह बराबर है. यहां तक कि इस जानलेवा वायरस का असर कारोबार पर भी नजर आ रहा है. ऐसे में हाल ही में भारत यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस वार्ता में बयान दिया कि अमेरिका कोरोना का टीका तैयार करने के 'बहुत करीब' पहुंच चुका है. ट्रंप का ये दावा अपने देश के हेल्थ एक्सपर्ट्स के बयानों पर आधारित है.
 National Institute of Allergy and Infectious Diseases के डायरेक्टर Dr. Anthony Fauci ये साफ कर चुके हैं कि अमेरिकी टीम कोरोना का वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है और वो काफी हद तक सफल भी हो चुकी है.

COVID-19 से बचाव के लिए वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया में वायरस के जेनेटिक कोड का अध्ययन करने के बाद अमेरिकी हेल्थ टीम ने इसका स्पाइक प्रोटीन तैयार किया. इसी प्रोटीन की मदद से इसका टीका तैयार किया जा रहा है. हालांकि ये टीका कब तक बाजार में या आम लोगों की पहुंच में आएगा, ये साफ नहीं हुआ है. Dr. Fauci के अनुसार एक्सपर्ट्स ट्रायल के पहले चरण में हैं, जिसमें ये देखा जाता है कि टीका कितना सुरक्षित है. पहले ट्रायल के बाद ये जानने में लगभग 3 महीने लग सकते हैं कि टीका कितना सुरक्षित है या फिर कितना प्रभावी है.

इसके बाद बड़े स्तर पर ट्रायल होगा, जिसमें सैकड़ों मरीजों को शामिल किया जाएगा. बता दें कि पहले चरण के ट्रायल में सिर्फ 45 मरीजों को लिया जाएगा. Dr. Fauci कहते हैं कि चाहे कितनी ही तेजी से ये काम किया जाए तो भी इसमें 6 से 8 महीने और लगेंगे. इसमें सफलता मिलने के बाद बड़े स्तर पर यानी बाजार में टीका उतरने में लगभग एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है. लेकिन ये भी तभी संभव है जब दोनों ट्रायल्स में सफलता मिले. किसी भी स्तर पर नाकामयाबी मिलने पर दोबारा नए सिरे से जेनेटिक सीक्वेंस पर काम करना होगा.
अमेरिका की नामी-गिरामी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Moderna ने सोमवार 24 फरवरी को एक प्रेस वार्ता में बताया कि वे COVID-19 के टीके की पहली खेप NIAID (National Institute of Allergy and Infectious Diseases) को भेज चुके हैं, जो पहले चरण के ट्रायल के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. हालांकि NIAID प्रमुख Dr. Fauci बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि टीके की टाइमलाइन इसी बात पर निर्भर है कि वो इंसानी शरीर पर कैसी प्रतिक्रिया करता है.

कोरोना की भयावहता को देखते हुए इसपर कई तरह की स्टडी की जा रही है. जैसे हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) ने कोरोना वायरस पर रिस्क एसेसमेंट करते हुए ये देखने की कोशिश की कि इसका खतरा किन्हें ज्यादा है. इसके शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि चीन में ही जो लोग इस खतरनाक वायरस से जूझ रहे हैं, उनमें से अधिकतर मरीज बुजुर्ग हैं, जो पहले से ही किसी न किसी किस्म की दिल की बीमारी का भी शिकार हैं, जैसे हाइपरटेंशन.
 फरवरी के मध्य में चीन में ही लगभग 70 हजार मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया. इसमें देखा गया कि लगभग 44,700 मरीजों में से 80 प्रतिशत लोगों की उम्र कम से कम 60 साल से ज्यादा थी और इसमें से भी आधे मरीज 70 साल या इससे अधिक उम्र के थे. ये स्टडी China CDC Weekly में प्रकाशित हुई. चीन से बाहर दूसरे देशों में मिलते-जुलते आंकड़े नजर आते हैं. जैसे इटली में सामने आए पहले 12 मरीजों में से सभी 80 साल की उम्र के आसपास थे. इनमें से कइयों को दिल की बीमारी थी.

स्टडी में सबसे दिलचस्प तथ्य बच्चों को लेकर सामने आया. इसके अनुसार बच्चों को कोरोना का खतरा बहुत कम है. चीन में हुई प्राथमिक स्टडी में पाया गया कि 10 से 19 साल के बच्चों में केवल 1 प्रतिशत ही संक्रमण से प्रभावित निकले. वहीं 10 से कम उम्र के बच्चों में ये इंफेक्शन 1 प्रतिशत से भी कम दिखा और कोई भी मौत रिपोर्ट नहीं की गई.
साभार

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